कोयले और NTPC के बकाए की अदायगी करने के साथ ही ऊर्जा एक्सचेंज से भी पर्याप्त बिजली की खरीद की जाएगी।

लखनऊ। कोयले की कमी से पटरी से उतरी बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुधारने के लिए प्रदेश सरकार 10 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। कोयले और एनटीपीसी के बकाए की अदायगी करने के साथ ही ऊर्जा एक्सचेंज से भी पर्याप्त बिजली की खरीद की जाएगी। सरकार की कोशिश है कि प्रदेशवासियों को बिजली की अतिरिक्त कटौती का सामना न करना पड़े। सभी को शाम छह बजे से सुबह सात बजे तक पहले की तरह तय शेड्यूल के मुताबिक बिजली मिलती रहे।

दरअसल, 90 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज में डूबे पावर कारपोरेशन के सामने गंभीर वित्तीय संकट है। जहां निगम प्रबंधन कोयले का भुगतान करने की स्थिति में नहीं है, वहीं एनटीपीसी आदि द्वारा आपूर्ति की गई बिजली का भी बकाया समय से नहीं दे पा रहा है। ऐसे में कोयले के संकट के चलते बिजली की किल्लत से निगम प्रबंधन एनर्जी एक्सचेंज की 20 रुपये यूनिट तक बिजली खरीदने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। इससे प्रदेशवासियों को अतिरिक्त बिजली कटौती से जूझना पड़ रहा है।

1715 मेगावाट बिजली का उत्पादन ठप

कोयले की कमी से प्रदेश में अभी भी 1715 मेगावाट बिजली का उत्पादन ठप है। इसमें विद्युत उत्पादन निगम की हरदुआगंज, पारीछा, अनपरा व ओबरा का ही 950 मेगावाट उत्पादन बंद है। प्रतिदिन 79 हजार टन कोयला खपत वाले इन बिजली घरों के पास एक से दो दिन का ही कोयला है। बता दें कि प्रदेशवासियों को शेड्यूल के अनुसार, बिजली देने के लिए पावर कारपोरेशन ने 20 करोड़ रुपये से इनर्जी एक्सचेंज से औसतन 16.50 रुपये प्रति यूनिट की बिजली खरीदी है।

ऊर्जा मंत्री का दावा

ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के मुताबिक, प्रदेशवासियों को तय शेड्यूल के अनुसार बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि गांव को जहां 18 घंटे वहीं तहसील को 21.30 घंटे और बुंदेलखंड को 20 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल है। शहर और उद्योग बिजली कटौती से मुक्त हैं।

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