1998 में तत्कालीन राज्यपाल ने कल्याण सिंह को किया था मुख्यमंत्री पद से बर्खास्त।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का शंखनाद हो चुका है। 2022 का सियासी दंगल फतह करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी डटी हुई है तो वहीं समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव साइकिल का हैंडिल थाम कर उसे सड़क पर दौड़ा रहे हैं। प्रियंका से लेकर मायावती अपनी-अपनी जीत की हुंकार भर रही हैं। 10 मार्च को लखनऊ की कुर्सी पर कौन बैठेगा, उसका फैसला सूबे की जनता कर देगी, लेकिन हम आपको एक ऐसी राजनीतिक घटना से रूबरू कराने जा रहे हैं, जो इतिहास में दर्ज है। वर्तमान बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल सिर्फ 24 घंटे तक प्रदेश के चीफ मिनीस्टर रहे। कल्याण सिंह ने उनका तख्तापलट कर पद से हटाकर खुद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हुए थे। 

कोर्ट में पहुंचा था कुर्सी का मामला 

वर्ष 1998 में तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी ने कल्याण सिंह सरकार को बर्खास्त करते हुए, लोकतांत्रिक कांग्रेस के जगदंबिका पाल को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवा दी थी। जिसके बाद बीजेपी इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी, इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कम्पोजिट फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया था। जिसमें कल्याण सिंह को 225 मत हासिल हुए थे और जगदंबिका पाल को 196 वोट मिले थे। कल्याण सिंह ने तख्तापटल करते हुए जगदंबिका पाल को कुर्सी से बेदखल कर दिया। जगदंबिका पाल महज 24 घंटे तक सूबे के मुख्यमंत्री रहे।

कल्याण सिह की सरकार में थे मंत्री 

जगदंबिका पाल को कुर्सी से बाहर करने में तत्कालीन स्पीकर केसरी नाथ त्रिपाठी ने अहम रोल निभाया था। उन्होंने दूसरे दलों के 12 सदस्यों को मान्य करार देते हुए वोट देने का अधिकार दिया था। सभी ने कल्याण सिंह के समर्थन में वोट किया था। हालांकि बाद में इनके वोटों को घटा दिया गया था, बावजूद कल्याण सिंह के पास सदन में पूर्ण बहुमत था। जगदंबिका पाल उस वक्त कल्याण सिंह सरकार में मंत्री थे। उन्होंने विरोधियों के संग मिलकर तख्ता पलट कर दिया था। 

धरने पर बैठ गए थे अटल बिहारी वाजपेयी

राज्यपाल के फैसले के विरोध में बीजेपी के बड़े नेता अटल बिहारी वाजपेयी समेत कई नेता धरने पर बैठ गए थे। रात को ही हाईकोर्ट  में अपील दायर की गई। 22 फरवरी के दिन जगदंबिका पाल को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली। इसी बीच हाईकोर्ट ने राज्यपाल के आदेश को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कल्याण सिंह ही मुख्यमंत्री हैं। हर घंटे बदलती सिचुएशन के बाद कल्याण सिंह सचिवालय पहुंचे, जहां जगदंबिका पाल पहले से ही सीएम की कुर्सी पर बैठे हुए थे। हाईकोर्ट के आदेश की बात बताकर जगदंबिका पाल को कुर्सी से हटाया गया। जिसके बाद एक फिर कल्याण सिंह मुख्यमंत्री के रूप में फिर अपनी कुर्सी पर बैठे।

इंद्र कुमार गुजराल देश के प्रधानमंत्री थे

उस समय केंद्र में कांग्रेस समर्थित यूनाइटेड फ्रंट की सरकार थी और इंद्र कुमार गुजराल देश के प्रधानमंत्री थे। भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश की सत्ता से बेदखल होने के बाद दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी विपक्ष के नेता थे। कहा जाता है कि केंद्र सरकार के इशारे पर कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री के पद से बर्खास्त किया गया था। जिसको लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन भी हुए। कहा जाता है कि यहीं से दोबारा बीजेपी के उदय की शुरूआत हुई थी।

कौन हैं जगदंबिका पाल

अब बीजेपी से सांसद जगदंबिका पाल लंबे समय तक कांग्रेस में रहने के बाद फिलहाल भारतीय जनता पार्टी में हैं। वह उत्तर प्रदेश में सिद्धार्थनगर से बीजेपी के सांसद हैं। लोकसभा में उनका कार्यकाल बतौर सांसद काफी लंबा रहा है। कांग्रेस के बाद अब वह बीजेपी से सांसद हैं। जगदंबिका पाल, कई साल कांग्रेस में रहे। खुद का दल बनाया तो उनके सियासी कॅरियर मे एक दिन का मुख्यमंत्री का तमगा जुड़ गया, जो फिलहाल अपने आप में ये रिकार्ड है।

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