2022 में पहली बार डकैत व माफियाओं के बिना होंगे चुनाव, पाठा से नहीं जारी होंगे फरमान।

कानपुर। एक वक्त था जब चुनाव की डुगडुगी बजती तो पाठा-चंबल के अलावा कानपुर में बैठे डॉन सक्रिय हो जाया करते थे। जंगल से पत्र के जरिए मतदाताओं के नाम फरमान आते, तो शहरों के किलर अपने सफेदपोशों की जीत के लिए बंदूक कमर से निकाल कर सड़कों पर उतर जाते थे। चंबल के बाद यूपी एसटीएफ ने पाठा के खुंखार डकैत गौरी यादव का एनकाउंटर कर आखिरी खलनायक का काम तमाम कर दिया। जबकि कानपुर के आखिरी डॉन टॉयसन भी मर्डर केस के मामले में खुद को सरेंडर कर सलाखों के पीछे चला गया। योगी के राज में पहला चुनाव पत्र गन के बिना होने जा रहा है।

डकैतों का रहा सीधा दखल 

विश्व प्रसिद्ध पौराणिक तीर्थ चित्रकूट भगवान श्रीराम की तपोभूमि होने की वजह से विख्यात होने की बजाय आतंक का पर्याय रहे सात लाख के ईनामी दुर्दांत डकैत शिवकुमार उर्फ ददुआ, पांच लाख के ईनामी रहे अम्बिका पटेल उर्फ ठोकिया, सुदंर उर्फ रागिया, स्वदेश उर्फ बलखड़िया और बबली कोल और दस्यु गौरी यादव के जघन्य आपराधिक कुकृत्यों की वजह से कुख्यात रही है। मिनी चंबल के रूप में चर्चित पाठा के इस बीहड़ के डकैतों की पांच दशकों तक खासी दहशत रही है। डकैतों के एक फरमान मात्र से इलाके में ग्राम प्रधान से लेकर सांसद और विधायक तक बनते रहे हैं। लेकिन मायावती की सरकार 2007 में यूपी में आने के बाद डकैतों का खात्मा शुरू हुआ तो योगी सरकार में आखिरी डकैत गौरी यादव मारा गया। 

नहीं तो गोली पड़ेगी छाती पर 

पाठा के जंगल में शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ ने तीन दशकों तक राज किया। बिना उसके आशीर्वाद के ग्राम पंचायत से लेकर लोकसभा तक के चुनाव नहीं लड़े जा सकते थे। उसने बंदूक की नाल की जोर पर जंगल में वोट की फसल उगाई। कहा जाता है कि वह चुनाव में फरमान जारी करके वोटिंग का आदेश देता था। ‘मोहर लगेगी ... पर वरना गोली पड़ेगी छाती पर', जैसे ददुआ के फरमान लोगों की जुबान पर आज तक दर्ज हैं। 

 खत्म हुई डकैतों की राजनीति में दखल

साढ़े पांच लाख का ईनामी दस्यु गौरी यादव बुंदेलखंड के मिनी चंबल के रूप में कुख्यात चित्रकूट के पाठा क्षेत्र का अंतिम डकैत रहा है। एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश की टीम ने बहिलपुरवा के जंगल में मुठभेड के दौरान दस्यु गौरी यादव को ढेर किया। इसके अंत के साथ ही बुंदेलखंड का पाठा दस्यु विहीन हो गया।

2022 में पहली बार होगा भयमुक्त चुनाव

पाठा के बीहड़ में आतंक के पर्याय रहे डकैतों के अंत के बाद अब 2022 में होने जा रहा विधानसभा चुनाव बिना डकैतों के दखल के सम्पन्न होगा। इस बार के चुनाव में किसी भी राजनैतिक दल या प्रत्याशी के समर्थन में डकैतों का फरमान जारी नही होगा। पुलिस अधीक्षक धवल जायसवाल का कहना है कि दस्यु समस्या धर्म नगरी के विकास में हमेशा बाधक रहीं है। अब दोबारा क्षेत्र में कोई डकैत पैदा न हो इसके हर संभव प्रयास किये जायेगे। इसके अलावा चित्रकूट के दस्यु विहीन होने से पर्यटन विकास को रफ़्तार मिलेगी।

माफिया-डॉन का खत्म हुआ दखल

2022 का चुनाव जहां डकैतों के बिना होगा, वहीं माफिया-डॉन का दखल भी नहीं होगा। योगी सरकार के पिछले साढ़े चार साल के कार्यकाल के दौरान पुलिस ने 175 से ज्यादा अपराधियों को एनकाउंटर में मार गिराया तो वहीं पांच हजार से ज्यादा को पकड़ कर सलाखों के पीछे भेजा। मुख्तार, अतीक समेत दर्जनों माफिया के घर पर बुलडोजर चला। कानपुर की डी-टू गैंग की पुलिस ने कमर तोड़ दी। रईस बनारसी के वाराणसी में मारे जाने के बाद मोनू पहाड़ी की हत्या जेल में हो गई। डी-टू गैंग के आखिरी डॉन टॉयसन मर्डर केस में खुद को सरेंडर कर जेल चला गया। 

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