ऑनलाइन पढ़ाई करने की अपील ।

नई दिल्ली। अंग्रेजों की डेढ़ सौ साल की हुकूमत से 1948 में बाहर निकला श्रीलंका अपनी आजादी के बाद के सबसे बड़े आर्थिक संकट का सामना कर रहा है । खाने-पीने के सामान, दूध, गैस, केरोसिन तेल और दवाओं जैसी ज़रूरी चीज़ों की कीमतें आसमान छू रही हैं । 12-13 घंटे यानी आधे-आधे दिन तक बिजली गुल रहती है, पेट्रोल-डीज़ल के लिए ऐसी मारामारी रही कि पेट्रोल पंपों पर सेना तैनात करनी पड़ी । पड़ोसी मुल्क श्रीलंका अब भी बेहद बुरे दौर से गुजर रहा है । 

अर्थव्यवस्था कंगाली की हालत में है और देश में अब भी खाने-पीने की भारी किल्लत है यहां तक कि नगदी की कमी से भी लोग काफी परेशान हैं । परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है । जब से श्रीलंका में आर्थिक संकट आया है, तब से भारत ने 3 अरब डॉलर से ज्यादा की सहायता दी है लेकिन इतने से भी काम नहीं चल रहा है । श्रीलंका को भारत से 8 अरब डॉलर की दरकार है, जिसके मुताबिक तब ये देश पटरी पर आ सकता है । श्रीलंका में राजनीतिक उठापटक के बाद सरकार बदल गई, लेकिन लोगों की मुश्किलें कम न हुई । 

ऑनलाइन पढ़ाई करने की अपील

नगदी की कमी से जूझ रहे स्कूलों को और एक सप्ताह के लिए बंद रखने का फैसला किया गया है । इससे पहले भी श्रीलंका सरकार ने आगामी सप्ताह के लिए सभी स्कूलों को बंद करने का ऐलान किया था। लोगों को घरों से ही काम करने की सलाह दी गई है । शिक्षकों और अभिभावकों के पास बच्चों को स्कूल पहुंचाने के लिए पर्याप्त ईंधन नहीं है । फिलहाल श्रीलंका में तेल खत्म हो गया है । खाने-पीने की कीमतों में आग लगी हुई है एक तरह से देखा जाए तो श्रीलंका दिवालिया हो चुका है । श्रीलंका के पास जरूरी सामानों की भारी किल्लत है ।

जरूरी सामान भी हुए महंगे

पेट्रोल-डीजल से लेकर दूध, राशन, दवा इतनी महंगी हो गई कि लोग खरीद नहीं पा रहे हैं । पेट्रोल 254 रुपये प्रति लीटर जबकि 1 किलो दूध 263 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है । एक ब्रेड की कीमत फिलहाल 150 रुपये है । 710 रुपये में एक किलो मिर्च और 200 रुपये में एक किलो आलू मिल रहा है । श्रीलंका में डॉलर की कीमत 300 रुपये हो गई है । ब्लैक मार्केट में एक डॉलर 400 रुपये में मिल रहा है । पड़ोसी देश श्रीलंका की अर्थव्यवस्था घुटनों के बल रेंग रही है । हालत ये है कि आर्थिक तंगी और बदहाली से परेशाम आम नागरिक सड़कों पर आ गए हैं । फिलहाल श्रीलंका अब एक संकट के मुहाने पर खड़ा है । जिस पर अगर काबू नहीं पाया गया तो उसका भारत के सुरक्षा हालात पर गंभीर असर होगा ।

ऊर्जा मंत्री ने किया ये खास आह्वान

ऊर्जा मंत्री कंचना विजेसेकरा ने देश के बाहर रहने वाले नागरिकों से अपील की है कि वे अनौपचारिक माध्यमों के बजाय बैंकों के माध्यम से अपनी विदेशी मुद्रा में अर्जित आय घर भेजें, ताकि देश में विदेशी मुद्रा की कमी को दूर करने में मदद मिले । ऊर्जा मंत्री ने पत्रकारों से कहा, ‘‘ रकम जुटाना चुनौतीपूर्ण है । ये एक बहुत बड़ी चुनौती है ’’ उन्होंने कहा कि सरकार ने नए ईंधन ‘स्टॉक’ का आदेश दिया है और 40,000 मीट्रिक टन डीज़ल लिए एक विमान के देश पहुंचने की उम्मीद है, जबकि एक दूसरे विमान में 22 जुलाई को पेट्रोल लाया जाएगा । उन्होंने बताया कि ईंधन की कई खेप आनी है, लेकिन अधिकारी उसके लिए भुगतान करने के वास्ते 58.7 करोड़ डॉलर जुटाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं ।

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