सपा प्रमुख ने फतेहाबाद विधानसभा सीट से अशोक दीक्षित की बेटी को चुनाव के मैदान में उतारा।

आगरा। यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर आगरा में सर्दी के बीच सियासी तपिश बरकरार है। जीत-हार के दावे के साथ ही उम्मीदवार जनता के घर पर जाकर नए-नए वादे कर रहे हैं तो वहीं अखिलेश यादव ने जनपद की फतेहाबाद विधानसभा सीट पर अपना प्रत्याशी बदल दिया। यहां से सपा प्रमुख ने ‘बाहुबली’ अशोक दीक्षित की बेटी रूपाली दीक्षित को टिकट देकर चुनाव के मैदान में उतार दिया है। इंग्लैंड में कार्डिफ यूनिवर्सिटी से एमबीए पास करने वाली रूपाली कहतीं हैं कि 10 मार्च को ‘महाराज जी’ मठ चले जाएंगे और लखनऊ की कुर्सी पर ‘भैया अखिलेश’ बैठेंगे। सूबे में बदलाव की बयार है और जनता साइकिल दौड़ाने का मन बना चुकी है।

पिता दो बार लड़ चुके हैं चुनाव

आगरा में सपा ने फतेहाबाद विधानसभा सीट से बाहुबली अशोक दीक्षित की बेटी रूपाली दीक्षित मैदान में हैं। दो बार उनके पिता अशोक दीक्षित भी फतेहाबाद से चुनाव मैदान में उतर चुके हैं, लेकिन वो जीत नहीं पाए। पिता के बाद अब बेटी चुनाव लड़ रही है। उनका कहना है कि पिता जो न कर सके, वो उसे करेंगी। उनका कहना है कि उनके पिता गरीबों का शोषण करने वाले के लिए बाहुबली हैं। उनके खिलाफ राजनीति के चलते मुकदमे दर्ज करवाए गए। हमें अपनी न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। वह निर्दोष होकर आएंगे और गरीबों का शोषण करने वालों के खिलाफ आखिरी सांस तक लड़ेंगे।

पिता पर दर्ज हैं चार दर्जन से ज्यादा केस

मूलरूप से फिरोजाबाद के रहने वाले बाहुबली और गैंगस्टर अशोक दीक्षित पर अलग-अलग थानों में चार दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। अभी अशोक दीक्षित हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। अब अशोक दीक्षित की छोटी बेटी रूपाली दीक्षित चुनाव के मैदान में हैं। रूपाली विदेश में पढ़कर आई हैं। उन्होंने इंग्लैंड में कार्डिफ यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है। इसके बाद कई बड़ी कंपनियों में नौकरी की। मगर, नौकरी छोड़कर वो 2016 में राजनीति में आई थीं।

2017 में बीजेपी की ली थी सदस्यता

रूपाली ने 2017 में बीजेपी की सदस्यता ली थी। उनके बीजेपी में शामिल होने पर काफी हंगामा भी हुआ था। 2017 में टिकट न मिलने पर रूपाली चुनाव नहीं लड़ सकी । मगर, इस बार सपा ने पहले घोषित प्रत्याशी की टिकट काटकर रूपाली को टिकट दिया है। रूपाली का कहना है कि इस चुनाव में अपने पिता के संघर्ष को आगे बढ़ाऊंगी। जो वो नहीं कर पाए, मैं वो करके दिखाऊंगी। पिता की जो थोड़ी बहुत कसर रह गई थी, उसे मैं पूरा करूंगी। किसी वजह से लोगों ने उन्हें पसंद नहीं किया, तो पसंद मैं पूरी करूंगी।

गरीबों के लिए बाहुबली नहीं थे

 रूपाली का कहना है कि उनके पिता की बाहुबली वाली छवि से उनके चुनाव पर असर नहीं पडे़गा। उनके पिता गरीबों के लिए बाहुबली नहीं थे, बल्कि उनके लिए बाहुबली थे जो गरीबों का शोषण करते थे। रूपाली दीक्षित का कहना है कि उनकी बीजेपी-बसपा दोनों से टक्कर है। दोनों पार्टियां जातिवाद पर चुनाव लड़ेंगी। मगर, मैं जातिवाद को घुलने नहीं दूंगी। मगर, मेरे दिमाग में छोटेलाल वर्मा के चोटी काटने वाले शब्द अभी भी घूम रहे हैं। उनका पता होना चाहिए कि हम भी जवाब देने को तैयार हैं।

अखिलेश यादव परफेक्ट सीएम

रूपाली ने कहा कि अखिलेश यादव ने बतौर सीएम सूबे में बहुत विकास कार्य कराए। जबकि ‘महाराज जी’ की सरकर सिर्फ नाम बदले में लगी रही। जनता बदलाव का मन बना चुकी है। बीजेपी के नेता भी सत्ता परिवर्तन की बात जान पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी में आ रहे हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य कद्दावर नेता हैं। बीजेपी ने उनका सम्मान नहीं किया। वह अब सपा प्रमुख के साथ हैं। इसके अलावा कई और नेता आने वाले दिनों में बीजेपी छोड़ेंगे। 

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