बारिश के चलते सैकड़ों गांव में बाढ़ का कहर, श्मशान घाट पर पानी भरा होने पर उठाया कदम।

दरभंगा। पिछले कई दिनों से देश के कई राज्यों में मूसलाधार बारिश हो रही है, जिसके चलते लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। बिहार के दरभंगा में बारिश के चलते आई बाढ़ से हालात भयावह हो गए हैं। हालात इस कदर खराब हो गए हैं कि शव की चिता जलाने के लिए सूखी जमीन नहीं बची। जिसके चलते एक बेटे ने मां की मौत के बाद उसके शव का दाह संस्कार करने के लिए मचान बना डाला और उसी में चिता सजाई।

कुशेश्वरस्थान के महिसौत गांव निवासी शिवनी यादव की लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई थी। श्मशान घाट में पानी भरा हुआ था। ऐसे में मृतका के बेटे ने पहले तो शव जलाने के लिए किसी दूसरी जगह की खोज की, लेकिन गांव बाढ़ के पानी से घिरा हुआ था। बेटे ने ग्रामीणों की मदद से श्मशान घाट में ही अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। नाव के जरिए घाट तक मां के शव को लेकर बेटा गया और मचान में अंतिम संस्कार किया। अंतिम परिक्रमा के लिए भी नाव का सहारा लिया।

इस तरह से बनाया मचान

मृतका के बेटे के अलावा ग्रामीणों ने पानी में डूबे श्मशान में बांस का मचान बनाया। मचान के ऊपर आग जलाने के लिए घर में अनाज रखने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मिट्टी की बड़ी कोठी रखी गई। मिट्टी से बनी इस कोठी में शिवनी का शव रखकर उसकी चिता सजाई गई।  इसके बाद शिवनी के बेटे रामप्रताप ने मुखाग्नि दी।

बाढ़ का कहर, सुन नहीं रहे अफसर

शिवनी के बेटे रामप्रताप ने बताया कि आसपास के सैकड़ों गांव बाढ में घिरे हुए हैं। बाढ़ का पानी लोगों के घरो पर भर गया है। एक सप्ताह के अंदर मेरे गांव में ही अकेले सौ से ज्यादा मवेशी बाढ़ के पानी में बह गए और उनकी मौत हो गई। रामप्रताप के साथ ही अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए बताया कि स्थानीय जनप्रतिनिधि व सरकारी अफसरों से बाढ़ के बावत अवगत करा चुके हैं पर किसी ने सुधि नहीं ली।

बोलने से किया इंकार 

गांव में शव जलाने तक के लिए जमीन न मिलने की इस घटना को सरकारी अफसर सामान्य मानते हैं। कुशेश्वरस्थान पूर्व के सीओ त्रिवेणी प्रसाद ने इस घटना की जानकारी नहीं होने की बात कही। जबकि जिले के डीएम ने भी इस पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। मचान का मामला सोशल मीडिया में आने के बाद विपक्ष के नेताओं नीतीश सरकार पर जुबानी हमले तेज कर दिए हैं।

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