पुलिस पहले पांच को भेज चुकी है जेल, विजय यादव की गिरफ्तारी के बाद एसआईटी सभी को ले सकती है रिमांड पर।

मनीष गुप्ता हत्याकांड में आखिरी आरोपी भी गिरफ्तार I Daily Janmat News I DJN |

कानपुर। गोरखपुर स्थित होटल में कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की हत्या कर दी गई थी। मर्डर का आरोप छह पुलिसकर्मियों पर लगा था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर एसआईटी गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही थी। सरकार ने आरोपियों पर एक लाख रूपये का इनाम भी रखा। जिसके बाद पांच आरोपी पुलिस के हत्थे लगे तो छठे दरोगा विजय यादव को भी पुलिस दबोच लिया।

हत्या के बाद से चल रहा था फरार

मूलरूप से जौनपुर का निवासी फरार दरोगा विजय यादव की तलाश में एसआईटी के अलावा एसटीएफ की टीमें लगातार ऑपरेशन चला रही थीं। मुखबिर की सटीक सूचना पर आरोपी दरोगा विजय यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। सूत्रों के मुताबिक विजय यादव की गिरफ्तारी के बाद एसआईटी एक साथ सभी 6 आरोपितों को रिमांड पर ले सकती है। इसके लिए एसआईटी ने अपनी तैयारियां शुरू भी कर दी हैं।

अब पुलिस ले सकती रिमांड पर

सभी आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है। ऐसे में अब एसआईटी इनकी कोर्ट से रिमांड ले सकती है और घटना के बारे में पूछताछ करने के साथ ही एक बार फिर सीन रिक्रिएट भी कराया जा सकता है। रिमांड के दौरान सभी आरोपितों को एक साथ बैठाकर एसआईटी यह जानने की कोशिश करेगी कि वारदात में किसकी क्या भूमिका रही? साथ ही आरोपितों और चश्मदीदों के बयानों का भी मिलान कराया जाएगा। सभी बातें पूरी तरह स्पष्ट होने के बाद ही इस मामले की चार्जशीट की धाराओं पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

6 पर दर्ज करवाया था मुकदमा

बतादें, मनीष गुप्ता की हत्या के बाद इस मामले में मृतक की पत्नी मीनाक्षी गुप्ता की तहरीर पर पुलिस ने 6 पुलिस वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या का केस दर्ज किया है। लेकिन अब तक की जांच में एसआईटी को हत्या की इरादे से पुलिस वालों के होटल में चेकिंग करने के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि गैर इरादतन हत्या के एक नहीं बल्कि एसआईटी ने पर्याप्त सबूत जुटा लिए हैं।

इन्हें भी आरोपी बना सकती है एसआईटी

मनीष हत्याकांड मे इंस्पेक्टर जेएन सिंह, दरोगा अक्षय मिश्रा, राहुल दुबे, सिपाही प्रशांत कुमार और हेड कांस्टेबल कमलेश यादव  पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं। छठे आरोपी को भी पुलिस पकड़ चुकी है। वहीं सामने आए तथ्यों में होटल कर्मचारी की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। ऐसे में इंकार नहीं किया जा सकता कि एसआईटी कर्मचारी को मिलीभगत तो मालिक को तथ्य छिपाने में आरोपी बना सकती है।

धारा 34 बढ़ा दी

यही वजह है कि एसआईटी ने इस मामले में सबूत मिटाने की आईपीसी की धारा 201 और सभी के साथ मिलकर घटना को अंजाम देने की धारा 34 बढ़ा दी है। अब एसआईटी आरोपितों के बयान के बाद इस मामले में शामिल कुछ अन्य लोगों को भी आरोपित बनाने की तैयारी कर रही है। एसआईटी का दावा है कि नियमानुसार 90 दिन के भीतर मामले की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी जाएगी। अब तक की जांच में पर्याप्त सबूत, बयान और गवाह जुटा लिए गए हैं। सिर्फ सामने आई बातों का मिलान कर इस मामले में अंतिम निर्णय लेना ही शेष बचा है।

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