फसलों को बचाने की मौसम वैज्ञानिकों ने दी ये सलाह।

#kanpur: कोल्ड वेव का अलर्ट, कार्डियोलॉजी निदेशक ने जारी किया हेल्प लाइन नंबर//daily janmat news

कानपुर। यूपी के कानपुर समेत आसपास के शहरों में सर्दी का सितम लगातार बढ़ता ही जा रहा है। बुधवार को दोपहर बाद कुछ देर के लिए धूप जरूर निकली लेकिन बर्फीली हवाओं से हाड़ कंपा देने वाली गलन पड़ी। जैसे-जैसे दिन ढलता गया, सर्दी का कहर बढ़ता गया। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के मौसम विभाग के अनुसार पहाड़ों से आनी वाली हवाओं की वजह से अभी ठंड से राहत मिलने वाली नहीं है।

अधिकतम तापमान एक दिन पहले की अपेक्षा तीन डिग्री बढ़कर 13.2 पर जरूर पहुंच गया, लेकिन सामान्य तापमान से यह 3.5 डिग्री सेल्सियस कम रहा। इसी तरह न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री बढ़कर 8.4 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। मौसम विभाग के अनुसार आसमान साफ होने की वजह से रात के समय तापमान और गिर सकता है। इस बीच ग्रामीण क्षेत्रों में पाला पड़ना भी शुरू हो गया है। इससे फली और नरम तने वाली फसलों को नुकसान हो सकता है। सीएसए के मौसम विभाग ने फसलों को पाला से बचाने के लिए एडवाइजरी भी जारी की है।

नर्सरी में पौधों को ढककर रखें 

पाले से सबसे अधिक नुकसान नर्सरी को होता है। नर्सरी में पौधों को रात में प्लास्टिक की चादर से ढकने की सलाह दी जाती है। पौधों को ढकते समय इस बात का ध्यान जरूर रखें कि पौधों का दक्षिण-पूर्वी भाग खुला रहे, ताकि सुबह व दोपहर को धूप मिलती रहे। 

10 जनवरी तक पाले का खतरा

मौसम विभाग के अनुसार 10 जनवरी तक पाला पड़ने की संभावना है। यह स्थिति तब होती है जब आसमान साफ हो जाता और तापमान कम हो जाए। पाला गेहूं, जौ, सरसों, जीरा, धनिया, सौंफ, अफीम, मटर, चना, गन्ना के अलावा टमाटर, मिर्ची, बैंगन को 30 से 60 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा सकता है।

इन बातों का रखें ध्यान

- पुराने रोगी, कोरोना से ठीक हुए लोग ठंड में बाहर न निकलें।

- नसों के रोगी गर्म कपड़ा लपेटकर शरीर को गर्म रखें।

- हाई ब्लड प्रेशर के रोगी जांच कराकर दवा की डोज दुरुस्त करा लें।

- ब्लड प्रेशर न बढ़ने दें, इससे ब्रेन और हार्टअटैक पड़ सकता है।

 दमा और अस्थमा के रोगी ठंड से बचें, दवा की डोज दुरुस्त कराएं।

- गर्म कमरे से अचानक बाहर ठंड में न निकलें।

- बाहर जाना हो तो पहले सामान्य तापमान में रुकें।

- छोटे बच्चों को गर्म कपड़े से ढंके रहें, माताएं शिशुओं को कंगारू केयर दें।

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