इससे पहले वो बुधवार को मेहरबान सिंह पुरवा में पहुंचे थे और यहां सांसद सुखराम सिंह यादव के यहां आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

डेली जनमत न्यूज डेस्क। कानपुर दौरे पर पहुंचे  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद गुरूवार को हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय (एचबीटीयू) के शताब्दी समारोह में बतौर मुख्त अतिथि शामिल हुए। यहां उन्होंने एचबीटीयू को कई उपहार दिए। हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय (एचबीटीयू) की स्थापना के गुरुवार को सौ वर्ष पूरे हुए। इसी को लेकर यहां कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें प्रेसीडेंट कोविंद ने कई सौगातें दीं। इससे पहले वो बुधवार को मेहरबान सिंह पुरवा में पहुंचे थे और यहां सांसद सुखराम सिंह यादव के यहां आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

कार्यक्रम का किया शुभारंभ

 विश्वविद्यालय के पश्चिमी कैंपस में करीब 11 बजे राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द पहुंचे और कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उनके इस कार्यक्रम में स्मारक सिक्के, डाक टिकट का अनावरण कर संस्थान के सौ वर्षों की उपलब्धियों को संरक्षित करके बनवाए गए 400 किलो के टाइम कैप्सूल, शताब्दी स्तंभ, शताब्दी द्वार व आठ नए भवनों का लोकार्पण भी शामिल है। ये सारी सौगातें एचबीटीयू को प्रेसीडेंट के आगमन पर मिलीं।

100 साल पहले हुई थी स्थापना

हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय (एचबीटीयू) कहलाने वाले संस्थान की स्थापना गवर्नमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के रूप में 25 नवंबर 1921 को हुई थी। इसके बाद में यह 1921 में गवर्नमेंट टेक्निकल इंस्टीट्यूट फिर विश्वविद्यालय बना। 1926 में यह हरकोर्ट बटलर टेक्नोलाजिकल इंस्टीट्यूट बना और 2016 से विश्वविद्यालय है।

सुरक्षा में चूक, जांच के निर्देश

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की दो दिवसीय कानपुर यात्रा के लिए सुरक्षा व्यवस्था के विवरण से जुड़ा दस्तावेज कुछ व्हाट्सएप ग्रुप में प्रसारित किए जाने पर पुलिस ने जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस ने बताया कि दस्तावेज जिसमें सुरक्षा के बारे में विस्तृत विवरण, बलों की तैनाती और कोविंद के शिरकत वाले स्थान जैसी जानकारियां थी, वरिष्ठ अधिकारियों को वितरित किया गया था, लेकिन यह कुछ व्हाट्सएप ग्रुपों पर प्रसारित पाया गया, जिसके बाद कानपुर के पुलिस आयुक्त असीम अरुण ने मामले की जांच के आदेश दियें हैं । पुलिस आयुक्त अरूण ने बताया कि अपर पुलिस उपायुक्त (यातायात) राहुल मिठास को मामले की जांच करने और संबंधित ब्योरा जुटाने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि जांच अधिकारी को दस्तावेज को सार्वजनिक करने के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और इस काम के पीछे के तथ्यों और मंशा का पता लगाने के लिए कहा गया है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कुछ व्हाट्सएप ग्रुप पर मिली जानकारी में राष्ट्रपति को दी गई सुरक्षा, उनके बेड़े (फ्लीट), सभी स्थानों पर बलों की तैनाती और यहां तक कि सभी पुलिस कर्मियों के नाम, पदनाम और संपर्क नंबर और उनकी भूमिका का विवरण था।

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