कानपुर की सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र में सलिल विश्नोई इस बार इरफान सोलंकी को तगड़ी चुनौती दे सकते हैं।

कानपुर। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अब धीरे-धीरे रंग में आने लगा है। ऐसे में कानपुर की सीसामऊ विधानसभा सीट पर भी समाजवादी पार्टी के विधायक इरफान सोलंकी और बीजेपी के पूर्व विधायक व एमएलसी सलील विश्नोई ने जनसपंर्क शुरू कर दिया है। सार्वजनिक तौर पर इरफान सोलंकी और सलिल विश्नोई जब भी मिलते रहे हैं तो उनके संबंध काफी मधुर रहे हैं और राजनीति से इतर इरफान सोलंकी उन्हें चाचा कहकर संबोधित करते हैं। अब लखनऊ में तो चाचा-भतीजा एक हो गए हैं, लेकिन कानपुर की सीसामऊ सीट पर चाचा-भतीजे के बीच राजनीतिक जंग शुरू हो गई है।

गौरतलब है कि बीजेपी से तीन बार के विधायक रहे और व्यापारी नेता सलिल विश्नोई को सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए पार्टी ने संकेत दे दिया है। ऐसे में बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष सलिल विश्नोई टिकट के दावेदारों से मिलकर प्रत्याशी घोषणा से पहले ही नाराजगी दूर करने के प्रयास कर रहे हैं। इसके साथ ही जरीब चौकी के पास चुनाव कार्यालय खोलने की तैयारियां शुरू हो गई है। इस बार सीसामऊ सीट को बीजेपी अपने कब्जे में करना चाह रही है। यही कारण है कि बीजेपी ने प्रदेश उपाध्यक्ष सलिल विश्नोई को सीसामऊ से उतारने का मन बनाया है। बता दें कि सलिल विश्नोई पिछला चुनाव आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र से लड़े थे और सपा प्रत्याशी अमिताभ बाजपेयी से हार गए थे। 

इरफान को विरासत में मिली राजनीति

विधायक इरफान सोलंकी को राजनीति विरासत में मिली है। उनके वालिद मरहूम हाजी मुस्ताक सोलंकी आर्य नगर विधानसभा से साल 1996 और 2002 में लगातार 2 बार विधायक रहे। इरफान ने अपने वालिद की मृत्यु के बाद पहली बार साल 2007 में इस विधानसभा सीट से सपा के टिकट से चुनाव लड़कर जीत हासिल की। इसके बाद 2012 में नए परिसीमन के बाद यहां का जातीय समीकरण बदला और यह सीट सामान्य हो गई। इसके बाद साल 2012 और 2017 में सपा के हाजी इरफान सोलंकी लगातार जीतकर तीन बार के विधायक हैं। 

इरफान-सलिल के बीच कड़ी टक्कर!

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र में सलिल विश्नोई इस बार इरफान सोलंकी को तगड़ी चुनौती दे सकते हैं। इसका कारण इरफान के खिलाफ जनता की नराजगी बताई जा रही है। माना जा रहा है कि अगर कांग्रेस इस सीट से किसी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट देती है तो सपा के लिए कठिनाई और बढ़ जाएगी। ऐसे में बीजेपी के समीकरण किस प्रकार से फिट किए जाएंगे यह देखना रोचक होगा। हालांकि सभी अपने-अपने समीकरण लगा रहे हैं। अब देखना यह है कि इन सभी के बीच मतदाता किसकी ओर जाते हैं। 

20 सालों से बीजेपी को जीत का इंतजार 

कानपुर शहर की सीसामऊ विधानसभा बीजेपी और कांग्रेस का गढ़ रही है। इस विधानसभा सीट पर 5 बार कांग्रेस और 3 बार बीजेपी का कब्जा रहा। वर्तमान में सपा के हाजी इरफान सोलंकी विधायक हैं। इस सीट पर बीजेपी 1996 के बाद से जीत नहीं दर्ज कर पाई है। पिछले 20 सालों से बीजेपी को कानपुर की सीसामऊ सीट पर जीत का इंतजार है।

विधानसभा का जातीय समीकरण 

सीसामऊ विधानसभा में वोटर्स की संख्या करीब 2 लाख 71 हजार 413 है। इस सीट पर मुस्लिम वोटरों की संख्या लगभग 80 हजार है, जबकि दलित वोटरों की संख्या करीब 35 हजार, ब्राह्मण 55 हजार, कायस्थ 20 हजार, वैश्य 15 हजार, यादव 16 हजार, सिंधी-पंजाबी 2 हजार और अन्य वोटरों की संख्या 35 हजार के आस-पास है।

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