देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 532.86 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद की गई है।

डेली जनमत न्यूज डेस्क । अब देश की नई कृषि नीतियों में छोटे किसानों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। छोटे किसानों को सुविधा और सुरक्षा देने का एक गंभीर प्रयास किया जा रहा है। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत अब तक 1,04,441.45 करोड़ रुपये किसानों को दिए गए हैं।

खरीफ विपणन सत्र 2021-22 (Marketing Season) में 532.86 लाख मीट्रिक टन धान की (09.01.2022 तक) खरीद हुई। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक लगभग 64.07 लाख किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 1,04,441.45 करोड़ रुपये के भुगतान से लाभान्वित हो चुके हैं। पंजाब में अब तक सबसे अधिक 1,86,85,532 मीट्रिक टन धान खरीदा (Paddy Procurement) गया है। कुल 1,04,441.45 करोड़ रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से 64.07 लाख किसानों को फायदा पहुंचा है। खरीफ विपणन सत्र (केएमएस) 2021-22 में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीद सुचारू रूप से की जा रही है, जिस प्रकार से पिछले वर्षों में होती रही है। खरीफ विपणन सत्र 2021-22 में दिनांक 09.01.2022 तक चंडीगढ़, गुजरात, असम, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तेलंगाना, राजस्थान, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, एनईएफ (त्रिपुरा), बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 532.86 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद की गई है।

गौरतलब है कि सरकार दलहन, अनाज, तिलहन समेत कई और फसलों का MSP तय करती है। अनाज वाली फसलों की बात करें तो धान, गेहूं, बाजरा, मक्का, ज्वार, रागी, जौ का एमएसपी तय किया जता है। वहीं, दलहन फसलों में चना, अरहर, मूंग, उड़द, मसूर का एमएसपी सरकार निर्धारित करती है। इसके अलावा तिलहन फसलों में मूंग, सोयाबीन, सरसों, सूरजमुखी, तिल, नाइजर या काला तिल, कुसुम के साथ-साथ नकदी फसल जैसे गन्ना, कपास, जूट, नारियल का एमएसपी भी सरकार ही तय करती है।

बेमौसम बारिश से किसानों की चिंता बढ़ी

प्रदेश के कई जिलों में बेमौसम बारिश ने किसानों कि चिंताएं बढ़ा दी है। कुछ दिन पहले हुई ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने किसानों की खड़ी फसल को काफी नुकसान पहुंचाया हैं। जिसने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें डाल दी है। फसल से कमाई करने की आशा तो दूर अब किसानों को फसल की लागत और नुकसान की भरपाई की चिंता सता रही है। किसानों की सब्जी और दलहन की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। पीड़ित किसानों ने शासन से मुआवजे की मांग की है।

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