20 साल तक तो मुकदमे की पैरवी दोनों पक्ष करते रहे। न्यायालय रिकॉर्ड के अनुसार बाद में पैरवीकार आने बंद हो गए।

डेली जनमत न्यूज डेस्क। यह एक ऐसी नजीर है जो अपने देश की न्याय व्यवस्था को उजागर करती है। मामला है न्याय मिलने में देरी का। जिसमें वादी, प्रतिवादी के साथ-साथ वो सिनेमा हॉल भी खत्म हो चुका है, जिंदा है तो बस कोर्ट में तारीख पर तारीख। पूरा मामला बिहार के बक्सर जिले के डुमरांव अनुमंडलीय कोर्ट है। 

मामला करीब 62 साल पुराना है। तब वर्तमान के भोजपुर, भभुआ व रोहतास को मिलाकर एक जिला शाहाबाद होता था। उस समय बक्सर में 'तुलसी टाकीज' नाम का एक सिनेमाहाल था। इसके मालिक बद्री प्रसाद जायसवाल थे, जिनका काफी पहले निधन हो चुका है। उनका मुम्बई की फ़िल्म वितरक कम्पनी गाऊमंट काली प्राइवेट लिमिटेड से लेनदेन को लेकर विवाद हो गया था। इस पर कम्पनी ने मुम्बई हाईकोर्ट की शरण ली। 24 नवम्बर 1958 को कोर्ट ने टाकीज में लगा कम्पनी का सामान लौटाने व 60 हजार रुपये कम्पनी को दिए जाने का आदेश दिया। 

सिनेमा हॉल के मालिक ने उक्त आदेश पर स्टे के लिए शाहाबाद स्थित सब जज द्वितीय के न्यायालय में मुकदमा  किया। मुकदमें की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अंतरिम निषेधाज्ञा लगा दी। इसी बीच बद्री प्रसाद जायसवाल ने पटना उच्च न्यायालय में वाद दायर कर दिया। वाद पर सुनवाई करते हुए पटना उच्च न्यायालय ने स्थगनादेश निर्गत कर दिया। इसके बाद पहले के आदेश पर कार्रवाई रुक गई, लेकिन तारीख पड़ती रही। शाहाबाद से अलग होने के बाद मामला आरा कोर्ट में चलने लगा और बक्सर जिला बनने के बाद यहां स्थानांतरित हुआ। तब से यह मुकदमा कोर्ट में चल रहा है। मुकदमें की सुनवाई  की अगली तारीख 17 अगस्त रखी गई है।

सालों से नहीं आया कोई पैरोकार

20 साल तक तो मुकदमे की पैरवी दोनों पक्ष करते रहे। न्यायालय रिकॉर्ड के अनुसार बाद में पैरवीकार आने बंद हो गए। तुलसी टाकीज की तरफ से अधिवक्ता कुंज बिहारी सिन्हा व गाउमंट काली प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से अधिवक्ता शंकर प्रसाद पैरवी कर रहे थे। दोनों के न रहने के बाद कोई पैरवीकार नहीं आया। अनुमंडलीय न्यायालय के वरीय अधिवक्ता सइदुल आजम कहते हैं कि इस मुकदमे को कब का समाप्त हो जाना चाहिए था, लेकिन 1959 में ही हाइकोर्ट से स्थगनादेश निर्गत होने के कारण निचली अदालत सुनवाई बंद नहीं कर सकती। इसी वजह से प्रक्रिया के तहत तारीख पर तारीख पड़ रही है।

सिनेमाहॉल की जगह बन गया मॉल

डुमरांव में कभी जिस जमीन पर तुलसी टॉकिज हुआ करता था, वहां अब मॉल बन गया है। स्थानीय लोग बताते हैं कि बद्री प्रसाद जायसवाल के निधन के बाद तुलसी टाॅकिज बिक गई थी। बाद में इसके नए मालिक ने हॉल को तुड़वाकर यहां सिटी लाइफ नामक मॉल खड़ा कर लिया।

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