2020 में कम सीटें मिलने के बाद भी मुख्यमंत्री बने थे नीतीश।

नई दिल्ली। बिहार में इन दिनों खूब सियासी उठा-पटक चल रही है। जहां अटकलें हैं कि नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू-बीजेपी का गठबंधन टूट सकता है। वहीं, जेडीयू और आरजेडी के फिर से एक साथ आने की चर्चाएं तेज हो रहीं है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सभी सांसद और विधायकों को अगले दो दिन में पटना पहुंचने को कहा है। उधर, आरजेडी भी इसी नक्शेकदम पर है। उसने सभी विधायकों को पटना में रहने के लिए कहा है। सूत्रों के मुताबिक, नीतीश ने सोनिया गांधी से टेलीफोन पर बात की। 11 अगस्त तक राज्य में नई सरकार बन सकती है। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि मंगलवार को ही तेजस्वी यादव अपने सभी विधायकों के साथ बैठक करेंगे। हालांकि, सरकार के भविष्य को लेकर जेडीयू नेताओं ने कोई आधिकारिक बात नहीं कही है।

सरकार संकट पर जेडीयू सांसद का बड़ा बयान

दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में झंझारपुर के जेडीयू सांसद रामप्रीत मंडल ने कहा कि बिहार की राजनीति में कुछ भी संभव है। ये टर्निंग पॉइंट है। हम लोगों के पहुंचने से पहले ही वहां कुछ भी हो सकता है। हमारे नेता नीतीश कुमार हैं, वो जो फैसला लेंगे वो मान्य होगा। इस बयान को लेकर माना जा रहा है कि सरकार को लेकर नीतीश कुमार कुछ फैसला ले सकते हैं।

2020 में कम सीटें मिलने के बाद भी मुख्यमंत्री बने थे नीतीश

2020 में नीतीश की पार्टी जेडीयू की 28 सीटें घट गई थीं और वह 43 पर आ गई, जबकि बीजेपी की 21 सीटें बढ़कर 74 पर पहुंच गई थीं। इसके बावजूद बीजेपी ने नीतीश को मुख्यमंत्री बनाया था। एनडीए को 125 सीटें और महागठबंधन को 110 सीटें मिली थीं।

नीतीश बीजेपी से क्यों हैं नाराज?

सूत्रों के मुताबिक, उन्हें सरकार चलाने में फ्री हैंड नहीं मिल रहा है। चिराग प्रकरण के बाद आरसीपी प्रकरण से भी बीजेपी से खफा हैं।

बीते कुछ महीने में नीतीश ने कई अहम बैठकों से दूरी बनाई है। कुछ महीने पहले वे पीएम की कोरोना पर बुलाई गई बैठक से दूर रहे।

हाल में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के सम्मान में दिए गए भोज, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शपथ ग्रहण समारोह में भी नहीं गए।

राज्य में बिहार के बीजेपी नेताओं से भी नहीं मिल रहे हैं। सीएम लोकल स्तर पर कार्यक्रमों में शामिल तो हो रहे हैं, लेकिन बीजेपी नेताओं से खुलकर ना तो बात कर रहे हैं ना ही उनसे मिल रहे हैं।

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