भारतीय नौसेना को कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी परियोजना-75 के तहत कुल छह पनडुब्बियों को सेवा में शामिल करना है।

डेली जनमत न्यूज डेस्क। भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा हुआ है। गुरूवार को पनडुब्बी आईएनएस वेला नौसेना में शामिल हो गई। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और चीन से चल रही तनातनी के बीच नौसेना की ये एक बड़ी उपलब्धि बताई जा रही है। भारतीय नौसेना को कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी परियोजना-75 के तहत कुल छह पनडुब्बियों को सेवा में शामिल करना है। आईएनएस वेला सेवा में शामिल की गई इस श्रेणी की चौथी पनडुब्बी हैं।

चीन-पाकिस्तान के ऑपरेशन पर करीब से नजर

नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह कहा कि बतौर नेवी चीफ मैं सभी का शुक्रिया करता हूं। उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकाल के दौरान एलएसी पर हालात थे और कोविड की चैलेंज था। उसके बावजूद हम दूसरे देशों से लिक्विड ऑक्सीजन लाए। साथ ही उनकी मदद भी की। हम चीन और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग पर करीब से नजर रख रहे हैं। नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने कहा कि चीन से पाकिस्तान द्वारा हाल ही में की गई खरीद में बदलाव आ सकता है, इसलिए हमें सतर्क रहने की जरूरत है।

 6 सबमरीन का निर्माण

प्रोजेक्ट 75 के तहत 6 पनडुब्बियों का निर्माण होना है, जिसमें से पहले ही 3 सबमरीन कमीशन की जा चुकी थीं और आज ये चौथी सबमरीन कमीशन की गई। नौसेना प्रमुख करमबीर सिंह ने गुरुवार सुबह इसे कमीशन किया। जब दुश्मन से निपटने की बात आती है तो आईएनएस वेला को आधुनिक और अपनी ताकत के लिए जाना जाता है।

एक सप्ताह में दूसरी उपलब्धि

पनडुब्बी को नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह की उपस्थिति में सेवा में शामिल किया गया। इससे पहले, नौसेना ने 21 नवंबर को युद्धपोत आईएनएस विशाखापट्टनम को सेवा में शमिल किया था। इस प्रकार नौसेना को एक सप्ताह में आईएनएस विशाखापट्टनम के बाद आईएनएस वेला के रूप में दो ‘उपलब्धियां’ हासिल हुई हैं।

ये है खासियत

  •  सबमरीन में एडवांस एकॉस्टिक साइलेंसिंग टेक्नीक का इस्तेमाल किया गया है
  •  रेडिएटिड नॉइस लेवल भी इसमें कम है
  •  सबमरीन का स्वरूप हाइड्रो-डायनामिक है. सटीक गाइडेड निशाना लगाने की ताकत रखने वाली ये सबमरीन दुश्मन को अपंग बना सकती है
  • आईएनएस वेला में पनडुब्बी संचालन के पूरे स्पेक्ट्रम को शुरू करने की क्षमता है
  • आज की गतिशील और जटिल सुरक्षा स्थिति को देखते हुए, इसकी क्षमता और मारक क्षमता भारत के समुद्री हितों की रक्षा के लिए नौसेना की क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी

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