जानिए क्या है इसके पीछे का रहस्य।

नई दिल्ली। जब भी आप टीवी में या किसी वीडियो में लोकसभा की कार्यवाही देखते हैं तो आपको एक बड़े से हॉल में सभी सीट रखी हुई नजर आती है, जहां सभी सांसद बैठते हैं। उनके सामने जज की सीट की तरह स्पीकर की सीट लगी होती है। आपने देखा होगा कि सबसे नीचे एक दम दाईं तरफ प्रधानमंत्री बैठे रहते हैं, जबकि लेफ्ट साइड में विपक्ष के सांसद बैठे रहते हैं। सभी सांसदों की सीट तय होती है और सांसद अपनी तय सीट के आधार पर बैठे रहते हैं। यहां 545 सांसदों के एक साथ बैठने की व्यवस्था होती है. लेकिन, कभी क्या आप जानते हैं इन करीब 545 सीटों में एक सीट सबसे खास है।

दरअसल, खास सीट का नंबर है 420। इस खास के खास होने की वजह ये है कि इस संसद में 420 नंबर की सीट ही नहीं होती है और 420वीं नंबर की सीट पर कुछ और ही लिखा होता है। तो जानते हैं क्या सही में ऐसा है कि 420 नंबर की सीट नहीं होती है और फिर 420 नंबर की सीट पर क्या नंबर दिए गए हैं। 

नहीं है 420 नंबर की सीट?

आपने देखा होगा कि कई मंजिल की बिल्डिंग होती है, लेकिन इन बिल्डिंग में 13वें नंबर का फ्लोर नहीं होता है। वैसे गिना जाए तो फ्लोर 13वें नंबर का ही होता है, लेकिन उसे 14वां फ्लोर गिना जाता है। इन बिल्डिंग में 12 के बाद 14वें फ्लोर का नंबर आता है। ऐसी ही कुछ कहानी 420 नंबर सीट की है। दरअसल, 420 नंबर फर्जी, धोखेबाज आदि के लिए इस्तेमाल किया जाता है, ऐसे में संसद में 420 नंबर की सीट नहीं है। आपको आगे 420 नंबर की कहानी भी बताएंगे।

फिर उस सीट पर क्या लिखा है?

अब सवाल है कि जब सीट पर 420 नहीं लिखा है तो फिर उस पर क्या 421 लिखा है या कुछ और। दरअसल, अब इस सीट को नंबर 419-ए दिया गया है। इस बात की पुष्टि भी ओडिशा से चार बार सांसद रहे बिजयंत पांडा ने की थी, जो अभी बीजेपी के उपाध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कुछ साल पहले अपने ट्वीट में इस कुर्सी की फोटो शेयर की थी और 419 ए के बारे में बताया था। 

420 क्यों है नेगेटिव?

दरअसल, संख्या 420 भारतीय दंड संहिता की एक धारा होती है। जिसे किसी ऐसे शख्स पर चस्पा की जाती है जो दूसरों को धोखा दे, बेईमानी करे या झांसे में लेकर किसी की संपत्ति हड़प ले। 420 धोखा, बेईमानी और छल-कपट से जुड़ी है। इसीलिए जब कोई धोखा या बेईमानी करता है तो लोग उसे 420 बोलते हैं।

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