एक किनारे ने बनाया पीएम तो अब दूसरे किनारे से भी सीएम की उम्मीद

DJN SPECIAL : गंगा की धार संग चुनावी बयार l Daily Janmat News l DJN

हरी मिश्र

कानपुर। हिंदू धर्म की सबसे पवित्र नदी जिसे हम मां गंगा के नाम से भी जानते और पुकारते हैं। भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने भी काशी में मां गंगा का नाम लेकर चुनावी युद्ध फतह किया था। उनका चुनावी रथ किसी भी दल के रोके नहीं रुका था। शायद कुछ ऐसा ही समाजवादी पार्टी व उसके मुखिया भी उम्मीदें लगाए हुए हैं। इसी के चलते उन्होंने अपना चुनावी रथ निकालने के लिए कानपुर की गंगा के किनारे का सहारा लिया है। 

राजनीतिक प्रतिद्वंदिता में नेता धर्म और परंपराओं को लेकर कुछ भी बोलते रहते हों, लेकिन अपने जीवन में खुद के धर्म को वो भी अहमियत देते हैं। इसका स्पष्ट उदाहरण है कि हिंदू धर्म की पवित्र नदीं गंगा में नेताओं की आस्था और विश्वास अक्सर दिखता रहता है। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी यूपी के वाराणसी को 2013 में जब अपना चुनावी क्षेत्र बनाया था तो उन्होंने अपने पहले ही भाषण में बोला था कि ‘न मुझे किसी ने बुलाया है, न मैं यहां आया हूं, मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है।' इसके बाद उन्होंने जहां बंपर जीत हासिल की थी वहीं बीजेपी केंद्र में भारी बहुमत से सरकार बनाने में सफल हुई थी। 

अब ऐसा ही कुछ समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी करते दिखाई दे रहे हैं। उन पर तमाम आरोप मुस्लिमों के हमदर्द होने के लगते रहे हैं, लेकिन उनकी भी आस्था मां गंगा में कम नहीं हुई है। 2011 में जब उनके दल ने जीत हासिल कर यूपी में सरकार बनाई थी, तब भी उन्होंने अपने चुनावी समर की शुरुआत कानपुर में गंगा के किनारे से ही की थी। इसी के चलते अब 2022 फतह के लिए एक बार फिर से उन्होंने अपने इस लक को गुडलक में बदलने के लिए गंगा किनारे का ही सहारा लिया है। अब देखना ये है कि अपनी लकी आस्था और विश्वास के बल वह कितना सफल हो पाएंगे।


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