इस वजह से लुढ़की रैंकिंग।

लखनऊ। स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 में प्रदेश के शहरों का प्रदर्शन अच्छा ना होने के चलते इस बार यूपी 8 पायदान नीचे खिसक गया है। चार साल से लगातार स्वच्छता सर्वेक्षण रैकिंग में ऊपर चढ़ रहा नगर निगम कानपुर इस बार फिसल गया। स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में कानपुर की फिर नाक कट गई।

इस बार कानपुर आठ पायदान लुढ़ककर 29वें स्थान पर आ गया। इससे पहले कानपुर 21वें स्थान पर था। हर घर से कूड़ा न उठ पाना, जगह-जगह पसरी गंदगी इसकी प्रमुख वजह रही। चिंता की बात ये भी है कि उत्तर प्रदेश का एक भी शहर टॉप-10 में जगह नहीं बना पाया।

यूपी का एक भी शहर शीर्ष 10 में शामिल नहीं

देश के सबसे स्वच्छ शहरों की रैंकिंग में यूपी का एक भी शहर शीर्ष 10 में शामिल नहीं है। गाजियाबाद ने लखनऊ को पछाड़कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया। पिछले सर्वेक्षण में यूपी में लखनऊ पहले और गाजियाबाद दूसरे स्थान पर था। केंद्र सरकार के स्वच्छता सर्वेक्षण पुरस्कार 2022 के परिणाम शनिवार को घोषित किए गए। 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में गाजियाबाद के बाद मेरठ, प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, आगरा और कानपुर का नंबर है। यानी लखनऊ एक नंबर से फिसल कर चौथे नंबर पर आ गया है।

इंदौर लगातार छठवें साल पहले नंबर पर

इंदौर लगातार छठवें साल पहले नंबर पर है। सर्वेक्षण के मुताबिक कानपुर में साफ-सफाई व्यवस्था दूसरे शहरों की तुलना में बेहद खराब है, जबकि साल भर से शहर को टॉप-10 में लाने का दावा किया जा रहा था। इसी तरह एक लाख से 10 लाख की आबादी वाले शहर में नोएडा देश में पांचवे और यूपी में 1 पहले नंबर पर है। प्रदेश में अलीगढ़ दूसरे, मथुरा तीसरे, फिरोजाबाद चौथे और गोंडा पांचवे स्थान पर है। एक लाख से 10 लाख की कैटेगरी वाले शहरों में नोएडा, अलीगढ़ और मथुरा के अलावा कोई भी शहर टॉप 100 में जगह नहीं बना पाया है।

प्रदेश की रैंकिंग फिसली

ओवर आल रैंकिंग में उत्तर प्रदेश की स्थिति पिछले साल की तुलना में बिगड़ी है। 2021 के सर्वेक्षण में यूपी का स्थान छठां था जबकि 2022 के सर्वेक्षण में उत्तर प्रदेश का स्थान 10वां आया है। कानपुर में स्वास्थ्य अफसरों की नगर निगम में फौज है लेकिन काम करने वाले सफाई कर्मचारी जरूरत से 50 फीसद कम है। शहर स्मार्ट और मेट्रो सिटी का दर्ज मिल गया है लेकिन सुविधाएं अभी भी महानगर के बराबर भी नहीं है।

इस वजह से लुढ़की रैंकिंग

कूडा उठाने के वाहन भी कम है। शहर में 68 वाहन मौजूद है जबकी जरूरत 90 वाहनों की है। इसके कारण दोपहर तक कूड़ा उठता रहता है। इसका रण सड़क पर गंदगी फैली रहने के कारण लोगों को आने जाने में दिक्कत होती है।अविकसित इलाकों में कूड़ा कई बार नहीं उठ पाता है। नगर निगम शहर के सभी 110 वार्डों  के घरों से कूड़ा उठाने में असफल है। 82 वार्डों से ही घर-घर कूड़ा उठ पा रहा है। उनमें भी कुछ वार्डों में ही नियमित कूड़ा उठ रहा।

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