केंद्र सरकार का कहना है कि गेहूं एक्सपोर्ट पर रोक का फैसला घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए लिया गया है।

डेली जनमत न्यूज डेस्क। भारत सरकार के गेहूं के एक्सपोर्ट पर रोक लगाने के बाद यूरोपीय बाजारों में गेंहू की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं हैं। सोमवार को विदेशी बाजार खुलने के साथ गेंहू की कीमत ($ 453) यानी 35,282.73 रुपए प्रति टन हो गई है। साथ ही देश में बढ़ते गेंहू के दामों को पर काबू पाने के लिए सरकार ने ये फैसला लिया है। तर्क दिया जा रहा है कि इस कदम से बढ़ती महंगाई से राहत मिल सकती है। हालांकि सरकार के इस फैसले का कुछ व्यापारी संगठन स्वागत कर रहे हैं तो कुछ आलोचना कर रहे हैं। 

दरअसल, सरकार के अचानक लिए गए इस फैसले से दुनियाभर में हलचल मच गई है। जी-7 समूह ने भी भारत सरकार के इस फैसले की आलोचना की है। जर्मनी के के कृषि मंत्री केम ओजडेमिर ने कहा है कि भारत के इस कदम से दुनियाभर में कमोडिटी की कीमतों का संकट और ज्यादा बढ़ जाएगा। अगले महीने जर्मनी में जी-7 शिखर सम्मेलन में इस मुद्दे को उठाया जाएगा। इस सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भाग लेंगे।इस रोक से पहले वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया था कि चालू वित्त वर्ष में गेहूं एक्सपोर्ट 100 से 125 लाख टन को पार कर सकता है। इस बार गेहूं खरीदार देशों में नया नाम मिस्र का जुड़ा है। भारत अभी 69 देशों को गेहूं एक्सपोर्ट कर रहा है। वित्त वर्ष 2021-22 में भारत ने 69 देशों को 78.5 लाख टन गेहूं एक्सपोर्ट किया। हालांकि, अचानक सरकार ने देश में गेंहू सकंट को देखते हुए ये फैसले सुनाया है।

गेहूं का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है रूस

रूस और यूक्रेन युद्ध से गेहूं एक्सपोर्ट भी प्रभावित हुआ है और ऐसी आशंका है कि आने वाले समय में भी गेहूं की आपूर्ति प्रभावित रहेगी। चीन और भारत के बाद रूस ही गेहूं का सबसे बड़ा उत्पादक है और गेहूं के एक्सपोर्ट के मामले में वह नंबर वन है। वहीं गेहूं निर्यातक देशों में यूक्रेन का पांचवां स्थान है। युद्ध को देखते हुए अमेरिका, लेबनान, नाइजीरिया और हंगरी सहित कई देशों ने रूस से गेहूं और कच्चा तेल सहित अन्य सभी चीजों के निर्यात पर रोक लगा दी है। ऐसे दुनिया में गेहूं की किल्लत होने लगी है। ऐसे में इस किल्लत को पूरा करने के लिए भारत ने गेहूं का एक्सपोर्ट बढ़ाया था। लेकिन अब भारत के गेहूं एक्सपोर्ट पर रोक के बाद विदेशी बाजारों में गेहूं महंगा होने लगा है।

इसलिए लगाया बैन

वहीं, सोमवार को वाणिज्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम ने कहा कि देश में कोई गेहूं आपूर्ति संकट नहीं है। गेहूं एक्सपोर्ट पर रोक का फैसला घरेलू बाजार में इसकी बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और देश के पड़ोसी तथा गरीब-कमजोर देशों की खाद्य जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कीमतों में सुधार आने पर सरकार अपने फैसले की समीक्षा कर सकती है। उन्होंने कहा कि रोक का फैसला सही समय में लिया गया है। उन्होंने कहा कि गेहूं के उत्पादन में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई है। देश में कोई संकट नहीं है। सरकारी स्टॉक और निजी स्टॉकों में पर्याप्त खाद्य मौजूद है। उन्होंने कहा कि रोक के कदम का मुख्य मकसद महंगाई को रोकना है। हम गेहूं के ट्रेड को एक निश्चित दिशा में बढ़ा रहे हैं। हम नहीं चाहते हैं कि गेहूं का अनियंत्रित तरीके से उन जगहों पर जहां इसकी जमाखोरी हो या फिर जहां इसका हमारी उम्मीद के मुताबिक इस्तेमाल न किया जाए।  

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