दुनिया में तेजी से कम हो रही कीड़ों की संख्या।

डेली जनमत न्यूज डेस्क। मक्खियां, मच्छर और तमाम दूसरे कीड़े-मकोड़े जब हमारे घरों, खाने के ऊपर मंडराते हुए दिखते हैं तो बेशक हमें ग़ुस्सा आता है। कभी-कभी हम उन्हें मारने के तमाम इंतज़ाम भी करते हैं।

लेकिन आगे से जब भी आप ऐसा करने वाले हों तो आपको ऐसा करने से पहले दो बार सोचना चाहिए, क्योंकि कीड़ों की आबादी दुनिया भर में तेज़ी से कम हो रही है। कीड़े हमारे वातावरण के संरक्षण और खाद्य पदार्थों के उत्पादन में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

कीड़ों पर टिकी है हमारी जिंदगी

अगर आप ये पूछें कि कीड़ों का काम क्या है तो सबसे अहम काम ये है कि कीड़े जैविक संरचनाओं को तोड़कर उनके अपघटन यानी ख़त्म करने की प्रक्रिया को तेज़ करते हैं। कीड़े इस तरह मिट्टी में भी उर्वरकों का संचार करते हैं। मेकलिस्टर कहती हैं, कल्पना करिए कि अगर हमारी दुनिया में मल के निस्तारण के लिए कीड़े न हों तो क्या होगा। बेशक दुनिया बेहद ख़राब होगी। कीड़ों के बिना हमारे आसपास मल ही मल होगा और मरे हुए जानवरों की लाशें।

छोटे जानवरों के लिए भी खाने का इंतज़ाम करते हैं कीड़े

वहीं, सिडनी यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉ. फ्रांसिस्को सांचेज बायो बताते हैं, लगभग साठ फ़ीसदी रीढ़ की हड्डी वाले जीव अपने भोजन के लिए कीड़ों पर निर्भर हैं। पक्षियों, चमगादड़ों, मेढकों और साफ़ पानी की कई मछलियां भी ग़ायब हो रही हैं। पोषक तत्वों की रिसाइकिलिंग का दारोमदार पूरी तरह ज़मीन और पानी में नीचे रहने वाले लाखों कीड़ों की गतिविधियों पर निर्भर है। और इसमें समुद्रों में रहने वाले लोग शामिल नहीं हैं।

मुफ्त में में सेवा देते हैं कीड़े

दूसरे जीवों के लिए खाने का सामान बनने के साथ-साथ अपघटन करने के अलावा कीड़े परागण के लिए भी बहुत ज़रूरी हैं। क्योंकि खाद्य उत्पादन के लिए परागण बेहद ज़रूरी है। एक अध्ययन के मुताबिक़, कीड़ों की वजह से दुनिया को 350 अरब अमरीकी डॉलर का फ़ायदा होता है। इसके बावजूद भी हम अक्सर कीट पतंगों से होने वाले फ़ायदों को लेकर अनभिज्ञ रहते हैं।

जंगली मधुमक्खियों की कम हो रही संख्या

जंगली मधुमख्यियों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है। वहीं बात करें तो तितलियों की सुप्रसिद्ध प्रजातियों में से एक मोनार्क तितली, जो कि कई जंगली फूलों के परागण में भूमिका निभाती है, की संख्या में भी काफ़ी कमी आ रही है। लेकिन एक सवाल ये उठता है कि क्या हम कीट-पतंगों की संख्या में कमी आने की समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं?

कितनी बड़ी है कीड़ों की दुनिया?

क्या आपको पता है कि दुनियाभर में कीड़ों की संख्या कितनी है?

अमरीकी संस्था स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूटशन के मुताबिक़, कीट पतंगों का कुल भर इंसानों के कुल भार का 17 गुना है। इस संस्था के मुताबिक पूरी दुनिया में अगर कभी भी कीड़ों की संख्या गिनी जाए तो ये संख्या 10 अरब अरब होगी।अंकों में लिखें तो 10,000,000,000,000,000,000।

डरावने तथ्य आ रहे सामने

साल 2019 के फरवरी महीने में जर्नल बायोलॉजिकल कंज़रवेशन में प्रकाशित एक रिपोर्ट एक डरावने कल की तस्वीर दिखाती है। इस रिपोर्ट के मुताबिक़, जर्मनी, ब्रिटेन और प्यूर्टाे रिको में कीट-पतंगों का बायोमास हर साल ढाई फीसदी की दर से घट रहा है। ये वो देश हैं जहां कीट-पतंगों की संख्या पर बीते तीस सालों से अध्ययन जारी है। इस रिपोर्ट के सह-लेखक डॉ. बायो बताते हैं, वो सभी जगहें जहां पर कीट-पतंगों की आबादी पर शोध किया गया है, वहां से ये पता चलता है कि 41 फ़ीसदी प्रजातियों की आबादी में कमी आ रही है। कीट-पतंगों की एक छोटे से समूह की आबादी में बदलाव नहीं दिखता है। वहीं कीट-पतंगों की प्रजातियां के एक बहुत छोटे से हिस्से की आबादी बढ़ रही है। शायद ये इस वजह से है क्योंकि ये प्रजातियां विलुप्त होते जीवों की जगह ले रही हैं।

खतरनाक बीमारी

साल 2017 में सामने आए एक अध्ययन में सामने आया कि बीते 30 सालों में जर्मनी के 60 संरक्षित क्षेत्रों में पतंगों की संख्या में 75 फ़ीसदी से ज्यादा कमी आई है। वहीं, एक अमरीकी शोधार्थी ने अपने शोध में पाया है कि प्यूर्टाे रिको के कैरिबियन द्वीप में बीते चार दशकों में 98 फीसदी की कमी आई है।

कीट-पतंगों का दुश्मन कौन?

ज्यादा खेती होने की वजह से कीट-पतंगों के रहने के स्थानों में कमी आने को उनके विलुप्तीकरण का मुख्य कारण माना जा रहा है.कॉफी के पेड़ों के परागण में भूमिका निभाने वाले पतंगे इसका उदाहरण हैं। डॉ. मेकलिस्टर बताती हैं, इन छोटे-छोटे जीवों को अपने वयस्क जीवन के लिए पेड़ चाहिए होते हैं। इनके लारवा सड़ती हुई पत्तियों में रहते हैं। अगर आप ऐसे छांवदार पेड़ों को खत्म कर देगें तो आप वो जगहें भी खत्म कर देते हैं जो इन कीट-पतंगों की अगली पीढ़ी के विकास के लिए ज़रूरी होते हैं।

पूरी स्टोरी पढ़िए