टिकट नहीं मिलने से छोड़ी पार्टी, जल्द बेटी भी करेगी रिजाइन।

बांदा। चर्चित टीवी सीरियल बिग बॉस के अलावा जाको राखे साइयां जैसी फ़िल्म में अभिनय कर चुकी गुलाबी गैंग कमांडर संपत पाल ने बड़ा ऐलान कर दिया है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के सभी पदों से रिजाइन कर कहा कि पंजे का कभी भला नहीं होगा। संपत पाल ने आरोप लगाया कि चाटुकारों के चलते उन्हें विधानसभा सीट का टिकट नहीं दिया गया। प्रियंका गांधी जब बुंदेलखंड आई थीं, तब नारा दिया था कि 'ल़ड़की हूं, ल़ड़ सकती हूं'। साथ ही कहा था कि वह 2022 में 40 फीसदी महिलाओं को टिकट देंगी। लेकिन उनका वादा कोरा साबित हुआ।

दो बार लड़ चुकी हैं विधायकी की चुनाव

संपत पाल ने बताया कि चित्रकूट के मऊ मानिकपुर विधानसभा क्षेत्र से 2012 और 2017 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी हूं। पिछले चुनाव में मैं दूसरे स्थान पर थी। पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी के महिलाओं को 40 फीसदी टिकट का ऐलान के बाद निश्चित ही महिलाओं का रुझान कांग्रेस की तरफ बढ़ा था। लेकिन जिस तरह से पहली सूची में जमीन पर काम करने वालों के बजाए दूसरे दलों से आए नेताओं को टिकट दिया। इससे साफ है कि कांग्रेस पार्टी सिर्फ झूठ के सहारे चल रही है और उत्तर प्रदेश में पंजे की हालत 2017 के मुकाबले 2022 में और खराब होगी।

गुलाबी रंग की साड़ी और हाथ में लाठी

1947 में जन्मी संपत देवी पाल ने उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के बदौसा गांव में रहकर ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर एक दल बनाया था। जिसका नाम गुलाबी गैंग रखा था। इस संगठन में कार्य करने वाली महिलाएं यूनिफॉर्म की भांति गुलाबी रंग की साड़ी पहनती हैं। इसी गुलाबी रंग के कारण ही इस गैंग को गुलाबी गैंग की पहचान मिली। उन्होंने महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए कई बार संघर्ष किया।

फिल्मों में भी किया काम

लाठी के बल पर न्याय दिलाने की उनकी कार्यशैली देशभर में इस तरह लोकप्रिय हुई की बॉलीवुड भी इनके चरित्र पर फिल्म बनाने को मजबूर हुआ।  इन्हीं के गैंग के नाम पर 'गुलाबी गैंग' फिल्म बनी। जिसमें माधुरी दीक्षित ने अभिनय किया है। संपत पाल ने खुद जाको राखे साइयां फिल्म में छोटी सी भूमिका अदा की है। बिग बॉस में भी संपत पाल को काम करने का मौका मिला। संपत पाल पहले समाजसेवा से जुड़ी रहीं फिर कांग्रेस के जरिए राजनीति में आई। संपत पाल की बेटी महिला जिलाध्यक्ष के पद पर हैं।

मायावती ने भिजवाया था जेल

महिलाओं पर अत्याचार और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाली संपत पाल ने कई बार जमाखोरों के घरों में छापेमारी की थी। भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ अभियान चलाया। कानून हाथ में लेने के कारण 2010 में मायावती के शासनकाल में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। अभी भी उनके ऊपर आधा दर्जन मुकदमे चल रहें हैं। संपत पाल ने कहा कि वह राजनीति में नहीं आना चाहती थीं, लेकिन गैंग की महिलाओं के कहने पर कांग्रेस ज्वाइन की। फिलहाल अभी किसी अन्य दल पर जाने का कोई विचार नहीं।

इटली में सोनियां गांधी से मुलाकात

संपत पाल ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय महिला संगठनों द्वारा आयोजित महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम में भाग लेने इटली गई थीं। उसी दौरान मेरी मुलाकात कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी से हुई थी और तभी वह कांग्रेस में शामिल हो गई थीं। सोनिया गांधी के कहने पर मैं राजनीति में आई। उन्होंने मुझे दो बार कांग्रेस से टिकट दिलाया। चुनाव डटकर लड़ीं। जिस बुंदेलखंड में सपा, बसपा का बीजेपी ने सफाया कर दिया, वहां हमने कांग्रेस को मजबूत किया। उन्होंने बताया कि पार्टी छोड़ने के बाद कांग्रेस के किसी नेता से बात नहीं हुई है।

100 प्रभावशाली प्रेरक महिलाओं के सूची में शामिल

2011 में अंतरराष्ट्रीय द गार्जियन पत्रिका ने संपत पाल को दुनिया की 100 प्रभावशाली प्रेरक महिलाओं के सूची में शामिल किया था। जिसके बाद कई देशी-विदेशी संस्थानों ने डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई थी। फ्रांस की एक पत्रिका ओह ने साल 2008 में संपत पाल के जीवन पर आधारित एक पुस्तक प्रकाशित की थी। जिसका नाम था ‘माय संपत पाल, चेफ द गैंग इन सारी रोज’, इसका मतलब है कि मैं संपत पाल गुलाबी साड़ी में, गैंग की मुखिया।

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