राहुल-सोनिया गांधी से पूछताछ के बाद शुरू हुआ एक्शन।

नई दिल्ली। ईडी ने धन शोधन मामले में नेशनल हेराल्ड के दफ्तर में छापा मारा है। 12 जगहों पर एक साथ छापे पड़ने से हड़कंप मच गया है। 

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन मामले की जांच के तहत कांग्रेस के स्वामित्व वाले ‘नेशनल हेराल्ड’ समाचार पत्र के मुख्यालय सहित यहां 12 स्थानों पर मंगलवार को छापा मारा। अधिकारियों ने बताया कि धन शोधन (निवारण) अधिनियम (पीएमएलए) की आपराधिक धाराओं के तहत छापे मारे जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाने के लिये अतिरिक्त सबूत एकत्र किए जा सकें कि धन का लेन-देन किसके बीच हुआ।

नेशनल हेराल्ड दफ्तर में कोई मौजूद नहीं 

बताया जा रहा है कि नेशनल हेराल्ड दफ्तर में सिक्योरिटी गार्ड के अलावा कोई भी मौजूद नहीं रहा। उधर, कांग्रेस सांसद उत्तर रेड्डी ने ईडी के छापेमारी को लेकर कहा है कि यह चौंकाने वाला है। कांग्रेस के नेताओं ने छापेमारी का विरोध किया है। नेताओं का कहना है कि ये छापेमारी सरासर गलत है। इस छापेमारी से सिर्फ सोनिया गांधी और राहुल गांधी को परेशान किया जा रहा है।

क्या है नेशनल हेराल्ड मामला

आरोप है कि नेशनल हेराल्ड एसोसिएटिड जर्नल लिमिटिड और यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटिड के बीच वित्तीय गड़बड़ियां हुईं थीं। नेशनल हेराल्ड एक अखबार था, जिसको जवाहर लाल नेहरू ने 500 स्वतंत्रता सेनानियों के साथ मिलकर शुरू किया था। इसमें ब्रिटिश के अत्याचारों के बारे में लिखा जाता जाता था। एसोसिएट जनरल पब्लिशर था। यह 20 नवंबर 1937 को अस्तित्व में आया था। उस वक्त यह तीन अखबारों को प्रकाशित करता था। इसमें नेशनल हेराल्ड (इंग्लिश), नवजीवन (हिंदी) एंड क़ौमी आवाज़ (उर्दू) शामिल इसमें शामिल था। फिर 1960 के बाद वित्तीय दिक्कतों से जूझने लगा। इस पर कांग्रेस पार्टी मदद के लिए आगे आई और एजेएल को बिना ब्याज वाला लोन दिया था। फिर अप्रैल 2008 में एजेएल ने अखबारों का प्रकाशन बंद कर दिया। फिर 2010 में पता चला कि एजेएल को कांग्रेस पार्टी का 90.21 करोड़ रुपये कर्ज चुकाना है। इसी बीच 2010 में ही 23 नवंबर को यंग इंडिया नाम से कंपनी बनती है। इसके दो पार्टनर थे। पहला सुमन दुबे और दूसरे सैम पित्रोदा। इस कंपनी को नॉन प्रोफिट कंपनी बताकर रजिस्टर कराया गया था। फिर अगले महीने दिसंबर की 13 तारीख को राहुल गांधी को इस कंपनी में डायरेक्टर बनाया जाता है। फिर कुछ दिनों बाद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सभी ऋणों को यंग इंडियन को ट्रांसफर करने पर सहमति व्यक्त करती है। इसके बाद जनवरी 2011 में सोनिया गांधी ने यंग इंडियन के डायरेक्टर का पदभार ग्रहण किया। इस समय तक सोनिया और राहुल गांधी ने यंग इंडिया के 36 प्रतिशत शेयरों पर नियंत्रण कर लिया था। बाद में कानूनी दिक्कत तब शुरू हुई जब अगले महीने यंग इंडियन ने कोलकाता स्थित आरपीजी समूह के स्वामित्व वाली कंपनी डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड से 1 करोड़ रुपए का ऋण लिया गया था। डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड को अब एक फर्जी कंपनी बताया जाता है। इसके कुछ दिनों बाद ही पूरे शेयर होल्डर को 90 करोड़ के एवज में ट्रांसफर कर दी गई। इनकम टैक्स विभाग का आरोप है कि गांधी परिवार के स्वामित्व वाली यंग इंडियन ने प्रोपर्टी जिसकी कीमत 800 से 2 हजार करोड़ के बीच है, उसपर सिर्फ 50 लाख रुपये का भुगतान करके हक जमा लिया या कब्जा कर लिया। हालांकि, कांग्रेस का कहना है कि यंग इंडिया प्रकाशन लिमिटेड कंपनी एक्ट के सेक्शन 25 के तहत रजिस्टर है।

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