आखिर कैसे बनता है शरीर में हीमोग्लोबिन।

डेली जमनत न्यूज। आपने कई बार देखा होगा हमारे शरीर की नसें नीली या हरे रंग की दिखती हैं। जबकि उन नसों में बहने वाला खून लाल होता है। जानिए जब खून का रंग लाल होता है, तो नसें नीली क्यों दिखती हैं?

खून का रंग लाल होता है, फिर भी हमारे शरीर की नसें नीले या जामुनी रंग की दिखती है। आमतौर पर एक धारणा बनी हुई है कि ऑक्सीजन युक्त खून लाल होता है, जबकि बिना ऑक्सीजन वाला खून नीला होता है। लेकिन यह सच नहीं है। खून का रंग सिर्फ लाल होता है। लाल रक्त कोशिकाओं में प्रोटीन जिसमें ऑक्सीजन होती है, उसे हीमोग्लोबिन कहते हैं। इसके प्रत्येक अणु में आयरन के चार परमाणु होते हैं, जो लाल प्रकाश को दर्शाते हैं। हमारे खून को लाल रंग देते हैं। खून में ऑक्सीजन के स्तर पर लाल का शेड बदलता है।

फेफड़ों से ऑक्सीजन लेने पर खून का बदल जाता है रंग

खून अलग-अलग लाल रंग का हो सकता है जब हीमोग्लोबिन फेफड़ों से ऑक्सीजन लेता है, तो खून का रंग चमकदार चेरी रेड होता है। इसके बाद यह खून धमनियों में और वहां से शरीर की टिश्यू तक जाता है। राजधानी दिल्ली के मुताबिक, शरीर की सभी टिश्यू तक ऑक्सीज़न पहुंचाने के बाद, जब यह खून फेफड़ों तक वापस आता है, तो नसों में बहने वाला बिना ऑक्सीज़न वाला खून गहरे लाल रंग का होता है।

वेवलेंथ को रेटीना अलग-अलग तरीके से देखता है

कहने का मतलब है कि खून अलग-अलग लाल रंग का हो सकता है लेकिन ऐसा कभी नहीं होता कि इंसान का खून नीला हो जाए। नीली दिख रही नसों से अगर खून निकाला जाए, तो वह लाल ही होगा। नसें त्वचा की पतली परत के नीचे होती हैं। हम जो रंग देखते हैं, वे उस वेवलेंथ पर आधारित होते हैं जिसे हमारा रेटिना समझता है। और त्वचा की अलग-अलग परतें वेवलेंथ को अलग-अलग तरीकों से बिखेरती हैं। 

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