पुलिस की आर्थिक अनुसंधान इकाई ने एक साथ नौ ठिकानों में की छापेमारी, करोड़ों की संपत्ति पकड़ी।

पटना। बिहार सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है। करप्शन में लिप्त आईपीएस, बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों, डीटीओ समेत सरकारी बाबुओं के घरों पर छापेमारी का दौर जारी है। इसी बीच बिहार पुलिस की आर्थिक अनुसंधान इकाई ने एक कांस्टेबल के नौ ठिकानों में रेड की तो अधिकारियों के होश उड़ गए। कांस्टेबल की संपत्ति करोड़ों में पाई गई है। पूरे मामले पर डीजीपी ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

बिहार पुलिस की आर्थिक अनुसंधान इकाई ने पटना जिला पुलिस बल के जवान और बिहार पुलिस मेंस एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष कांस्टेबल नरेंद्र कुमार धीरज के 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। टीम को कांस्टेबल के ठिकानों से नकदी के अलावा घर, प्रापर्टी, जेवरात और खेत सहित अन्य दस्तावेज मिले हैं। टीम के अधिकारियों की मानें तो कांस्टेबल की संपत्ति करोड़ों में है और इसका मुल्यांकन कराया जा रहा है।

कांस्टेबल पद पर तैनात धीरज के खिलाफ आय से अधिक यानि अकूत कमाई होने की शिकायत मिली थी। इस मामले की जांच आर्थिक अपराध थाने ने शुरू की जहां पर उसके खिलाफ केस सोमवार को केस दर्ज हुआ। जिसके बाद आज मंगलवार को एक साथ उनके कई ठिकानों पर छापेमारी जारी है। धीरज पर आरोप है कि उसने खुद और परिजनों के नाम पर करोड़ों रुपए की अचल संपत्ति अर्जित की है। रेड से प्रशासनिक खेमे में भी हड़कंप मचा है।

आरा में धीरज के कई भाइयों के प्लॉट और जमीन होने का खुलासा हुआ है। पटना के बेउर इलाके में स्थित महावीर कॉलोनी में भी जब ईओयू की टीम पहुंची तो आलीशान मकान देखकर दंग रह गई। टीम को कई लोकेशन से बेशकीमती सामान भी मिले हैं। कांस्टेबल के कई रसूखदारों से संबंध रहे हैं। अपराध शाखा की टीम ने कांस्टेबल को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ कर रही है।

बतादें बिहार के मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार की जड़ों पर प्रहार करने के लिए आर्थिक अनुसंधान इकाई को लगाया हुआ है। जिसके बाद से टीम लगातार कार्रवाई कर रही है। टीम ने कई भ्रष्ट अफसरों की संपत्तियों को जब्त करने के साथ एफआईआर दर्ज कराई है। जबकि बीते साल 2020 में दिसंबर के पहले हफ्ते तक 85 पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है। वहीं, सैकड़ों पुलिसकर्मियों के खिलाफ अभी जांच चल रही है।

दरअसल पूर्व डीजीपी अभयानंद ने एक बयान दिया था। जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए सिस्टम में बदलाव की बात कही थी। उन्होंने अपने अनुभवों का हवाला देते हुए कहा था कि एक ही स्थान पर एक व्यक्ति का लंबे समय तक तैनात करना ही भ्रष्टाचार की जननी है। ऐसे में एक कांस्टेबल का करोड़पति होना भी सूबे के पुलिसिया सिस्टम को बखूबी बयान करता है।

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