स्वास्तिक को बैन करने की ऑस्ट्रेलिया की पहले से थी तैयारी।

डेली जनमत न्यूज डेस्क। स्वास्तिक के प्रतीक को हिंदू धर्म में काफी आस्था की नजरों से देखा जाता है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से दुनियाभर में यह एक बार फिर गलत कारणों से चर्चा में बना हुआ है। यह तब हुआ जब ऑस्ट्रेलिया के दो राज्यों ने इस प्रतीक को बैन करने का निर्णय लिया है।

साउथ वेल्स और विक्टोरिया में स्वास्तिक के निशान को किसी भी तरह से दिखाना जुर्म माना जाएगा। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड और तस्मानिया ने भी स्वास्तिक को बैन करने की बात कही है। कानून के तहत नाजी प्रतीक चिन्ह को प्रदर्शित करना अपराध होगा और इसके लिए 22,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी लगभग 12 लाख रुपये का जुर्माना या 12 महीने की कैद अथवा दोनों सजाएं हो सकती हैं। इसके पहले जुलाई फिनलैंड राज्य ने अपने एयरफोर्स के प्रतीक चिन्ह से स्वास्तिक प्रतीक को हटा दिया था।

'स्वास्तिक नाजियों का प्रतीक' 

न्यू साउथ वेल्स के ज्यूइश बोर्ड ऑफ डेप्यूटीज के CEO डेरेन बार्क का कहना है कि स्वास्तिक नाजियों का प्रतीक है। यह हिंसा को दिखाता है। कट्टरपंथी संगठन भर्ती के लिए भी इसका इस्तेमाल करते हैं। हमारे राज्य में काफी समय से इसके प्रदर्शन पर रोक लगाने की बात चल रही थी। अब अपराधियों को सही सजा मिलेगी।

 स्वास्तिक कैसे बना नाजियों का प्रतीक 

1920 में हिटलर अपनी सेना को ताकतवर बनाने के लिए एक ऐसा झंडा चाहता था जो जर्मन लोगों और उसकी सेनाओं का प्रतिनिधित्व कर सके। जिसे देखते ही नाजियों में जोश भर जाए। 1935 के दौरान हिटलर की सेना लाखों यहूदियों को बेरहमी से मारा था। इसके बाद इस चिन्ह को यहूदी-विरोधी, नस्लवादी और फासीवादी माना जाने लगा। सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद यूरोप और दुनिया के दवाब में इस नाजी झंडा और स्वास्तिक जैसे प्रतीक को जर्मनी में भी बैन कर दिया गया था। इसके अलावा फ्रांस, ऑस्ट्रिया और लिथुआनिया में भी इसके इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी गई थी।

हिंदुओं और नाजियों के स्वास्तिक में फर्क  

हिंदुओं में इस्तेमाल होने वाले स्वास्तिक के चारों कोनों में चार बिंदुएं होती हैं। ये चार बिंदू चार वेदों के प्रतीक हैं। जबकि नाजियों के झंडे पर बने स्वास्तिक में कोई बिंदू नहीं होती है। हिंदुओं में स्वास्तिक पीला और लाल रंग का इस्तेमाल किया जाता है जबकि नाजी झंडे में सफेद रंग की गोलाकार पट्टी में काले रंग का स्वास्तिक बना है। जिसको ‘हकेनक्रेज’के नाम से जाना जाता है। नाजी संघर्ष के प्रतीक के तौर पर इसका इस्तेमाल करते थे। जबकि हिंदू धर्म में यह शुभ और तरक्की का प्रतीक माना जाता है। 

स्वास्तिक को बैन करने की पहले से थी तैयारी   

ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड और तस्मानिया ने भी स्वास्तिक को बैन करने की बात कही है। हैरानी की बात यह है कि ऑस्ट्रेलिया ने यह निर्णय अचानक नहीं लिया है बल्कि इसे बैन करने की तैयारी पहले से ही चल रही थी। रिपोर्ट के मुताबिक करीब एक साल चली बहस और विभिन्न समुदायों के साथ विचार-विमर्श के बाद लाया गया बिल विक्टोरिया राज्य की संसद ने पिछले हफ्ते पास कर दिया। इसके तहत राज्य में नाजी प्रतीकों का प्रदर्शन अपराध बन गया है। नाजी सिंबल प्रोहिबिशन बिल 2002 को मंगलवार को संसद की अनुमति मिल गई

पूरी स्टोरी पढ़िए