14वें राष्ट्रपति के लिए जल्द होंगे नामांकन।

नई दिल्ली। भारत के वर्तमान उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू हैं। जिनका कार्यकाल 10 अगस्त को समाप्त होने वाला है। बताते चलें कि 6 अगस्त को उपराष्ट्रपति का चुनाव होने वाला है और इसी दिन नतीजे भी जारी कर दिये जाएंगे। वर्तमान के उपराष्ट्रपति के कार्यकाल के 4 दिन पहले ही नये उपराष्ट्रपति की घोषणा कर दी जायेगी। उम्मीदवारों के नामों की घोषणा होना अभी बाकी है। 

देश में पहली बार उपराष्ट्रपति का चुनाव 1952 में हुआ था। सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के पहले उपराष्ट्रपति बने थे। वो दो कार्यकाल तक इस पद पर रहे। उपराष्ट्रपति का कार्यकाल भी पांच साल का ही होता है। ये चुनाव इसलिए अहम है क्योंकि उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति भी होता है। आइये जानते हैं, उपराष्ट्रपति का कार्यकाल। देश में इनका क्या है योगदान, और उनकी कार्यशक्तियां। 

उपराष्ट्रपति की एक झलक 

भारत के उपराष्ट्रपति का पद देश का दूसरा उच्चतम संवैधानिक पद है। उनका कार्यकाल पांच वर्ष की अवधि का होता है। लेकिन वह इस अवधि के समाप्त हो जाने पर भी अपने उत्तराधिकारी के पद ग्रहण करने तक, पद पर बने रह सकते हैं। उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक मंडल यानी इलेक्टोरल कॉलेज के जरिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से होता है। संसद के दोनों सदनों के सदस्य इसमें हिस्सा लेते हैं और हर सदस्य केवल एक वोट ही डाल सकता है। राष्ट्रपति चुनाव में चुने हुए सांसदों के साथ विधायक भी मतदान करते हैं लेकिन उप राष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद ही वोट डाल सकते है।

क्या हैं उपराष्ट्रपति की शक्तियां 

उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति की मृत्यु, पदत्याग, या बर्खास्तगी या अन्य कारणों से हुई राष्ट्रपति के पद की नैमित्तिक रिक्त की स्थिति में नए राष्ट्रपति का यथाशीघ्र निर्वाचन होने तक, जो किसी भी स्थिति में खाली होने की तारीख से छह माह के बाद नहीं होगा, राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है। जब राष्ट्रपति अनुपस्थित, बीमारी या अन्य किसी कारण से अपने कृत्यों का निर्वहन करने में असमर्थ हो, तब उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति द्वारा अपना कार्यभार पुनः ग्रहण करने तक उसके कृत्यों का निर्वहन करता है। इस अवधि के दौरान, उप-राष्ट्रपति को राष्ट्रपति की सभी शक्तियां, उन्मुक्तियां और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं।

जानें कौन कर सकता है उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए आवेदन 

 1- भारत का नागरिक हो। 

2- 35 साल वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो। 

3- वह राज्यसभा के लिए चुने जाने की योग्यताओं को पूरा करता हो। 

4- उसे उस राज्य या संघ राज्य क्षेत्र में संसदीय निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता होना चाहिए। 

5- कोई व्यक्ति, जो भारत सरकार के या किसी राज्य सरकार के अधीन या किसी अधीनस्थ स्थानीय प्राधिकरण के अधीन कोई लाभ का पद धारण करता है, वह इसका पात्र नहीं हो सकता है।

6- उम्मीदवार संसद के किसी सदन का या किसी राज्य के विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं होना चाहिए। अगर वह किसी सदन का सदस्य है तो उसे उपराष्ट्रपति चुने जाने के बाद अपनी सदस्यता छोड़नी पड़ेगी। 

उपराष्ट्रपति के चुनाव में ये कर सकते हैं मतदान

उपराष्ट्रपति चुनाव में राज्यसभा के 233 निर्वाचित सांसद, राज्यसभा में मनोनीत 12 सांसद और लोकसभा के 543 सांसद वोट डाल सकते हैं। इस तरह से कुल 788 लोग वोट डाल सकते हैं। जम्मू कश्मीर विधानसभा भंग होने के कारण इस वक्त राज्यसभा में जम्मू कश्मीर के कोटे की चार सीटें रिक्त हैं। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के इस्तीफे की वजह से भी एक सीट रिक्त है। इस तरह निर्वाचित सदस्यों की वर्तमान संख्या 228 ही है। वहीं, मनोनीत सांसदों की भी सात सीटें खाली हैं। इस तरह से इलेक्टोरल कॉलेज में कुल सदस्य संख्या फिलहाल 776 ही है। हालांकि, छह अगस्त से पहले इसमें बदलाव हो सकता है।

पूरी स्टोरी पढ़िए