सियासी नफा-नुकसान को देखते हुए अखिलेश ने शिवपाल के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का मन बनाया है।

Breaking News : सपा के विजय रथ यात्रा का पहला चरण I Daily Janmat News I DJN |

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगभग साढ़े चार साल पहले सत्ता गंवाने वाले समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव अब अगले साल होने वाले चुनाव में वापसी के लिए बेताब हैं। अखिलेश यादव साल 2012 की तरह एक बार फिर से 12 अक्टूबर से समाजवादी विजय रथ यात्रा पर निकल रहे हैं। उधर, अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव भी वृंदावन में श्रीकृष्ण के दर्शन करने के बाद चुनावी रथ पर सवार हो चुके हैं। फिलहाल चाचा-भतीजे यात्रा अलग-अलग जरूर निकाल रहे हों, लेकिन माना जा रहा है कि सियासी नफा-नुकसान को देखते हुए अखिलेश ने शिवपाल के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का मन बनाया है।

मिशन-2022 में जुटे अखिलेश यादव कानपुर के जाजमऊ से रथ यात्रा शुरू कर रहे हैं। यहां गंगा घाट पर गंगा दर्शन के बाद चुनावी रथ पर सवार होकर कानपुर नगर, कानपुर देहात, जालौन और हमीरपुर जिले के विधानसभा क्षेत्रों में जाकर सपा के बिगड़े सियासी समीकरण को दुरुस्त करेंगे। इस दौरान अखिलेश रथ यात्रा के जरिए योगी सरकार की खामियों को उजागर करेंगे और बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाने का काम करेंगे। दूसरी तरफ उनकी अपने परंपरागत वोट मुस्लिम और पिछड़ों के साथ दलितों को भी साधने की रणनीति है। 

190 किलोमीटर की यात्रा में चार जिलों का भ्रमण 

अखिलेश यादव दो दिन में 190 किलोमीटर की यात्रा में चार जिलों का भ्रमण करेंगे। इस यात्रा के जरिए अखिलेश यादव कानपुर-बुंदेलखंड का दौरा करेंगे। साल 2017 में यूपी की सत्ता गंवाने वाली समाजवादी पार्टी करीब 5 साल के लंबे अंतराल के बाद विजय रथ यात्रा के जरिए बेराजगारी, महंगाई समेत कई अन्य मुद्दे पर बीजेपी सरकार के खिलाफ जनसमर्थन हासिल करने का प्रयास करेगी।

शिवपाल ने शुरू की सामाजिक परिवर्तन रथ यात्रा 

सपा से अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी (लोहिया) पार्टी बनाने वाले शिवपाल यादव भी बहुत बड़ा करिश्मा नहीं दिखा सके हैं। विधानसभा चुनाव 2022 फतह करने को सामाजिक परिवर्तन रथ पर सवार होकर शिवपाल भी उत्तर प्रदेश का भ्रमण करने निकल पड़े हैं। शिवपाल ने बांकेबिहारी के दर्शन करके मथुरा-वृंदावन से सामाजिक परिवर्तन रथयात्रा शुरू की। यह यात्रा मथुरा से शुरू होगी और सात चरणों में रायबरेली में खत्म होगी।  

समाजवादी पार्टी में वर्चस्व की जंग 

बता दें कि 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मुलायम सिंह कुनबे में वर्चस्व की जंग छिड़ गई थी। इसके बाद अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी पर अपना एकछत्र राज कायम कर लिया था। अखिलेश और शिवपाल यादव के बीच गहरी खाई हो गई थी। हालांकि मुलायम सिंह यादव सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने दोनों नेताओं के बीच सुलह की कई कोशिशें कीं, लेकिन सफलता नहीं मिली। परिवार की कलह का खामियाजा सपा को 2017 के विधानसभा चुनाव में उठाना पड़ा। अखिलेश को सत्ता गवांनी पड़ी और पार्टी भी टूट गई। इस तरह से मुलायम की पार्टी और परिवार दोनों ही बंट गए।



ये भी पढ़ें 👇👇👇

मोदी ने काशी की गंगा का तो अखिलेश ने कानपुर की भगीरथी का थामा किनारा

पूरी स्टोरी पढ़िए